आधी रात में
आधी रात में
अचानक आती हुई
पुलिसिया सायरन की आवाज़
कितनी बेसुरी है,
कितना मार्मिक है
सुन लिए जाने के खौफ़ में लिपटी
घुटी हुई सिसकियों को सुन लेना
कितने डरावने हैं
चारों तरफ अट्टहास करते हुए चेहरे
जो सिसकियों में ढूंढ़ते है आत्मिक संतोष
जिनके लिए पुलिसिया सायरन
शास्त्रीय संगीत है
- पंकज झा
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