तैयार हो जाओ मुसाफ़िर

थी निशा घनघोर, अब
तैयार हो जाओ मुसाफिर

भोर का नव सूर्य तुमको, दे रहा है शुभ निमंत्रण!

ब्रह्म वेला में खरज की तान साधक है लगाता
रात्रि के अवसाद तज वो, गीत नूतन है सुनाता
मल के दृग, संताप तज तुम
ज्वार हो जाओ मुसाफ़िर

भोर का नव सूर्य तुमको, दे रहा है शुभ निमंत्रण!

कोकिलों का गान सुन, कुछ प्रेरणा उर में भरो
नींद त्यागो, नीड़ छोड़ो,  कर्म पथ पर पग धरो
रात्रि भर तुम सुप्त हो, अब
पुष्प हो जाओ मुसाफ़िर

भोर का नव सूर्य तुमको, दे रहा है शुभ निमंत्रण!

यह भी संभव है सुबह, माहौल कुछ प्रतिकूल हो
प्रस्तरों से पथ भरा हो, पग के नीचे शूल हो
होंगे सब निष्फल, प्रबल
हुंकार हो जाओ मुसाफ़िर

भोर का नव सूर्य तुमको, दे रहा है शुभ निमंत्रण!

- पंकज झा

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